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भारत में हॉकी से ज्यादा क्रिकेट क्यों लोकप्रिय है? ये हैं 6 बड़े कारण

जानिए क्यों भारत में क्रिकेट हॉकी से आगे निकल गया। 6 मुख्य कारण जैसे आईपीएल, खिलाड़ियों की सैलरी और सुविधाओं में अंतर की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।



क्यों भारत में हॉकी से ज्यादा क्रिकेट लोकप्रिय है? ये हैं वो 6 बड़े कारण

Why Cricket is more popular than Hockey in India in Hindi

​भारत में खेल प्रेमियों की कमी नहीं है, यहाँ फुटबॉल, टेनिस और बैडमिंटन जैसे कई खेल खेले जाते हैं। लेकिन जब बात आती है सबसे लोकप्रिय खेल की, तो क्रिकेट का नाम सबसे ऊपर आता है। क्रिकेट आज भारत के हर घर और हर दिल में बस चुका है, चाहे लड़के हों या लड़कियां। दूसरी ओर, हॉकी जो हमारा गर्व रहा है, आज की युवा पीढ़ी उसके बारे में उतनी जानकारी नहीं रखती और भूलती जा रही है।

​आज हम विस्तार से जानेंगे वो 6 बड़े कारण, जिनकी वजह से भारत में क्रिकेट ने हॉकी को पीछे छोड़ दिया है, साथ ही ऐसा क्या करे कि हॉकी को भी क्रिकेट के तरह सम्मान मिले और पहचान मिले।

​आर्टिकल को विस्तार से समझने से पहले, आइए इन दोनों खेलों की मौजूदा स्थिति को देखते हैं:
विशेषता (Feature) क्रिकेट (Cricket) हॉकी (Hockey)
मुख्य टूर्नामेंट IPL, World Cup Olympics, World Cup
ग्लोबल स्टार्स सचिन, विराट, धोनी ध्यानचंद, मनप्रीत सिंह
प्रसारण (Broadcast) बहुत ज्यादा (24/7) सीमित (Major Events)


​लोकप्रियता के 6 मुख्य कारण:

​1. आर्थिक अंतर और आईपीएल (IPL) का प्रभाव

कमाई का जरिया क्रिकेट (BCCI) हॉकी (Hockey India)
सालाना फिक्स सैलरी ₹1 करोड़ से ₹7 करोड़ तक ₹10 लाख से ₹25 लाख (नौकरी के साथ)
लीग मैच फीस (IPL vs HIL) ₹20 लाख से ₹25 करोड़ तक ₹2 लाख से ₹45 लाख तक
मैच फीस (प्रति मैच) ₹3 लाख से ₹15 लाख तक दैनिक भत्ता (DA) - ₹2000 के करीब
​क्रिकेट में आज जितना पैसा है, उतना दुनिया के किसी और खेल में कम ही देखने को मिलता है। भारतीय क्रिकेटर्स की सैलरी करोड़ों में है, जबकि हॉकी खिलाड़ियों को उनकी तुलना में बहुत कम मिलता है। आईपीएल के आने के बाद तो क्रांति ही आ गई है, जहाँ युवा खिलाड़ियों को रातों-रात शोहरत और पैसा मिलता है। युवा अब क्रिकेट को एक बेहतरीन करियर के रूप में देखते हैं क्योंकि यहाँ भविष्य सुरक्षित दिखता है।

​2. खेलने का तरीका और फिटनेस


​यह एक बहुत ही दिलचस्प कारण है। क्रिकेट में 11 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन मैदान पर एक समय में सिर्फ दो बल्लेबाज और एक गेंदबाज मुख्य भूमिका में होते हैं, बाकी खिलाड़ियों को थोड़ा आराम मिल जाता है। इसके विपरीत, हॉकी में सभी 11 खिलाड़ियों को पूरे मैच के दौरान मैदान पर लगातार भागना पड़ता है। हॉकी में फिटनेस का स्तर बहुत ऊंचा चाहिए और इसमें चोटिल होने का खतरा भी क्रिकेट से ज्यादा होता है।

​3. खेल के मैदानों और एकेडमी की कमी


​भारत के हर राज्य, जिले और गाँव में आपको क्रिकेट के मैदान या खेलने की जगह मिल जाएगी। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में तो लोग खेतों में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर देते हैं। लेकिन हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ (सपाट कृत्रिम घास) वाले मैदानों की ज़रूरत होती है, जो भारत में बहुत कम हैं। जहाँ क्रिकेट की एकेडमी हर नुक्कड़ पर खुली हैं, वहीं हॉकी एकेडमी और अच्छे कोच आज भी बहुत सीमित हैं। left;">​4. खेल के सामान की उपलब्धता
​क्रिकेट की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह है कि इसे किसी भी चीज़ से शुरू किया जा सकता है। क्रिकेट में क्या होता है कि अगर आपके पास बैट नहीं है, तो लकड़ी के पट्टे से जुगाड बन जाता है और जुराबों की गेंद या टेनिस बॉल से काम चल जाता है। लेकिन हॉकी के लिए हर खिलाड़ी के पास अपनी हॉकी स्टिक होनी चाहिए और साथ ही सुरक्षा के सामान होने ज़रूरी हैं, जिसे हर कोई खरीद नहीं पाता।

​5. शारीरिक बनावट और भारतीय हाइट


​हॉकी में अक्सर लंबी हाइट और मज़बूत कद-काठी वाले खिलाड़ियों को फायदा मिलता है क्योंकि इसमें खिलाड़ियों को झुककर तेज भागना होता है और आपस में काफी भिड़ंत होती है। क्रिकेट में शारीरिक बनावट का उतना असर नहीं पड़ता; इसका सबसे बड़ा उदाहरण सचिन तेंदुलकर हैं, जिन्होंने कम हाइट के बावजूद दुनिया पर राज किया। भारत के पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को छोड़ दें, तो औसत हाइट के हिसाब से क्रिकेट भारतीयों के लिए ज्यादा सहज रहा है।

​6. प्रमोशन और विज्ञापनों का खेल


​जब भी कोई क्रिकेट सीरीज़ या वर्ल्ड कप होता है, तो टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर उसका इतना प्रमोशन किया जाता है कि बच्चा-बच्चा उससे जुड़ जाता है। क्रिकेटर्स आज बड़े ब्रांड्स के चेहरे बन चुके हैं। इसके विपरीत, हॉकी के मैचों को उतना प्रमोट नहीं किया जाता। टेलिवीजन पर जब कोई क्रिकेटर आता है तो बच्चा भी उसे पहचान लेता है, लेकिन अगर कोई हॉकी प्लेयर टीवी में आता है तो उसे कोई पहचानने वाला नहीं है। भाई जब तक खिलाड़ी का चेहरा टीवी पर नहीं दिखेगा, लोग उसे पहचानेंगे कैसे? इसी कारण भारतीय हॉकी टीम के सितारों को आज भी वह पहचान नहीं मिल पाई है जो क्रिकेटर्स को मिली है।
​हॉकी को फिर से लोकप्रिय कैसे बनाएं?

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​हॉकी हमारा गौरव है और इसे वापस ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हमें कुछ ठोस कदम उठाने होंगे:

ग्रामीण स्तर पर एकेडमी: हर राज्य में हॉस्टल सुविधा वाली हॉकी एकेडमी होनी चाहिए।
अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच: क्रिकेट की तरह हॉकी में भी ज्यादा द्विपक्षीय सीरीज़ होनी चाहिए।
सैलरी और सुविधाएं: खिलाड़ियों के वेतन में बढ़ोतरी होनी चाहिए ताकि युवा इसे करियर के रूप में चुन सकें।
मीडिया कवरेज: टीवी पर हॉकी मैचों को भी उसी तरह प्रमोट किया जाए जैसे आईपीएल को किया जाता है।
अपने राष्ट्रीय खेल का विस्तार: हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है लेकिन उतना ही बुरा हाल इसका किया हुआ है, यह तो अच्छा हुआ कि  Hockey Indian League शुरू हो गया  नहीं तो हॉकी Olympics और Asian गेम्स तक ही सीमित हो गई थी।

​निष्कर्ष

​इसमें कोई शक नहीं कि क्रिकेट आज भारत का सबसे बड़ा खेल है, लेकिन टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के शानदार प्रदर्शन ने फिर से एक उम्मीद जगाई है। अगर सही सुविधाएं और प्रोत्साहन मिले, तो हॉकी अपना पुराना मुकाम वापस पा सकती है।

​आपकी क्या राय है? क्या क्रिकेट को भारत का राष्ट्रीय खेल घोषित कर देना चाहिए या हॉकी को फिर से वही प्यार मिलना चाहिए? कमेंट में हमें जरूर बताएं!

​धन्यवाद

Author name :- Shamu

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